रात को क्यों नहीं किया जाता पोस्टमार्टम(postmortem) ,जान कर हैरान हो जायोगे

जब भी किसी की मौत होती है हर किसी की मन में यही सवाल आता  कई लोगो को ये सवाल बहुत पेरशान  भी करता है। आखिर कर पोस्टमार्टम रात को क्यों नहीं किया जाता।  अपने बहुत सारी  मूवी और टीवी सीरियल  में भी देखा होगा पर आजतक किसी ने ये नहीं बतिया न ही किसी ने देखिया। 

इस बात के पीछे बहुत चौंकाने वाला सच  है।

पोस्टमार्टम क्या होता है।

 आजकल हर दुर्घटना के बाद अन्तम  संस्कार नहीं किया जाता जबतक पोस्टमार्टम न हो जाये। मै आपको बता दो पोस्टमार्टम एक मेडिकल प्रकिया  है जिससे मरने वाले की मौत का सही कारण पता लागिया जाता है।

दुर्घटना  के बाद पहले पुलिस मरने वाले की लाश का पंजीकार करके उसको मेडिकल टीम मतलब लोकल हॉस्पटिअल की टीम को बोला  कर पोस्टमॉर्टम के लये मरने वाले की बॉडी सौंप  देती है। पोस्टमार्टम  मरने वाले की मौत से 10 घंटे की अंदर किया जाता है।

एक क़ानून  भी  है जब तक मरने वाले का परिवार सहमत नहीं होता तब तक पोस्टमार्ट नहीं हो सकता ,हालांकि कुछ मामलों में पुलिस अधिकारी भी पोस्टमॉर्टम की इजाजत दे देते हैं, जैसे की हत्या।

एक मेडिकल  रिपोर्ट्स के मुताबिक  मरने वाला का पोस्टमारन  6  घंटे से  लेकर 10 घंटे की अंदर होना बहुत अनिवार्य है।  जैसा जैसा  समय  निकलता जाता है मरने वाले की बॉडी में बहुत से पर्वतन होना शुरू हो जाते है

मतलब उसका बॉडी में बदलाव जाता है  उसका बॉडी ढीला पड़ने लग जाता है और बॉडी की अंदर रसायनक परिवर्तन हो जाते है कुछ अलग तरह की अंजाम और जीवाणु पैदा हो जाते है जिससे मरने वाले का सही कारण नहीं पता चल पता।

किसी शव का पोस्टमार्टम दिन में ही किया जाता है यानि सूर्य उदय और सूर्य अस्त की बीच किया जाता है।  इसके पहिचे बहुत बड़ा मेमेडिकल साइंस का फर्न्स कारण है रात को लाल रंग बदल कर बैंगनी रंग में बदल जाता है। (लाल रंग चोटको दर्शता है )  फर्न्स मेडिकल में बैंगनी रंग की लये को प्रावधान नहीं है इस लये दिन की रौशनी में सब किया जाता ताकि सीटक रिपोर्ट आ  सके।

Leave a Comment